“अचार” का अपना एक अलग ही महत्व है ! हैं न ?

“अचार” नाम सुनते ही अधिकांश लोगों के मुंह में पानी आ जाता है। एक ऐसा खाद्य पदार्थ जो हर घर में जरूर पाया जाता है और बड़े ही चटकारे के साथ खाया जाता है। वैसे तो अचार ज्यादातर आम, कटहल, गाजर, नींबू, मिर्ची, अदरक, लहसुन के बनाए जाते हैं पर अब चिकन और मछलियों के भी अचार आसानी से मार्केट में उपलब्ध हैं। भारतीय घरों में गर्मी के मौसम आते ही आम, कटहल, मोटे मिर्च जैसे सब्जियां आनी शुरू हो जाती हैं और इस समय धूप भी काफी कड़ी होती है जो अचार के लिए उपयुक्त होती है। इस दौरान गृहणी अचार बनाना शुरू करती हैं, उनकी दिनचर्या होती है कि सुबह अचार को धूप में निकाल कर रख देना और शाम तक उसे वापस घर में वापस रखना। एक समय था जब हर कोई अपने घर में ही अचार बनाया करता था पर मार्केट जैसे- जैसे बढ़ा, बड़ी-बड़ी कंपनियां आई तो अब विभिन्न प्रकार के अचार सस्ते दरों पर हर जगह उपलब्ध हैं। 80- 90 के दशक में पचरंगा अचार बहुत फेमस हुआ करता था, जिसके तर्ज पर आज बहुत सारी कंपनियां मिक्सड पिकल बेच रही पर वो लाजवाब टेस्ट मिलना मुश्किल है। आज तो ₹1 के सैशे में भी अचार मिल रहा और लोग अपने विभिन्न आयोजनों में उसका इस्तेमाल भी करते हैं। तेल मसाले युक्त सब्जियों को कुछ दिनों तक धूप में पकाने के बाद जो अचार तैयार होता है वो घर से दूर रहने वाले बच्चे, विद्यार्थी और अन्य कामगार ही जानते है। सफर के दौरान पूड़ी या आलू भरा, सत्तू भरा पराठा के साथ सब्जी, भुजिया या चटनी नही अचार ही से मजा आता है। विदेशों में रहने वाले भारतीय हर साल बड़ी संख्या में अपने घरों, अपने मित्रों से अचार मंगाना पसंद करते है। अचार अब तो विनेगर से भी बनाए जाते है और बहुत तरह के सब्जियों के बनाए जा रहे। जैसे बांस (कनैल), केरी, टमाटर, गोभी, आदि।

एक समय था जब सब्जी के जगह अचार भोजन के साथ ज्यादा लो तो बड़े बुजुर्ग डांटते थे कि यह ज्यादा खानी नही चाहिए, नुकसान करेगा। हो सकता है इस के पीछे भी कुछ तर्क रहा होगा, पर महिलाएं तो इसकी दिवानी सी होती है। बहुत से क्षेत्रों में तो माड़-भात-अचार काफी पसंदीदा व्यंजन है।

जो भी हो लेकिन आज भी लोग अचार घर का बना ही ज्यादा पसंद करते है, इस कारण कच्चे आम की भी अच्छी खासी डिमांड रहती है। वैसे यह कम मात्रा में ही खाते है पर पहुंच हर एक के दिलो में होती है।

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